आजादी के 70 साल बाद भी रेल लाइन नहीं होने से पिछड़े जिलों की सूची से बाहर नहीं आ पाया खरगोन
70 साल जन प्रतिनिधियों द्वारा रेल के नाम पर वोट मांगे और भुला दिया गया
Curated by - AKHILESH GUPTA | CITYCHIEFNEWS
खरगोन, निमाड़ क्षेत्र में रेल लाइन की मांग एक बार फिर जोर पकड़ने लगी है। रविवार को ताप्ती नर्मदा रेलवे लाइन निमाड़ क्षेत्र समिति के बैनर तले धरना प्रदर्शन किया गया। यहाँ वक्ताओं ने पिछले 60 वर्षों से चली आ रही रेल लाइन की मांग पूरी नही होने के लिये शासन, प्रसासन के साथ जनप्रतिनिधियों को जिम्मेदार ठहराया।
वक्ताओं ने कहा हमारे जनप्रतिनिधियों ने चुनावो में रेल लाने के वादे कर विधानसभा, लोकसभा का रास्ता तय किया, वहां पहुंचने के बाद रेल लाइन का रास्ता छोड़ दिया। यही कारण है कि क्षेत्र विकसित होने के बाद भी आर्थिक रूप से कमजोर है। समिति अध्यक्ष राधेश्याम पाटीदार ने बताया समिति ने खंडवा के सहेजला से अलीराजपुर को जोड़ने वाले रेल लाइन का प्रस्ताव तैयार किया है। इसे स्वीकृत एवं अमलियजामा पहनने के लिए समिति प्रयास कर रही है। मांग पूरी करने के लिये जनांदोलन की जरूरत है क्योंकि यह मांग किसी एक जिले या गांव के लिये नही बल्कि आने वाले भविष्य के लिये है।
निमाड़ वासियो के लिए रेल मुद्दा बीते 70 साल से सपना ही रहा है। वर्ष 1968 मे शशिभूषण वाजपेई से लेकर सुभाष यादव अरुण यादव सुभाष पटेल और गजेंद्र पटेल ने रेल लाइन लाने की बात कहकर चुनाव मे वोट बाटोरे।
चुनाव और बजट स्तर मे उठते रहे सवाल
निमाड़ मे रेलवे लाइन को लेकर चुनावी मुद्दा तों रहा है। साथ बजट सत्र के दौरान लालूप्रसाद यादव के रेल मंत्री रहते अरुण यादव द्वारा सर्वें की स्वीकृति लीं। परन्तु सरकार बदल गई और सपना सपना ही रह गया। उसके हाल ही मे सांसद गजेंद्र पटेल ने निमाड़ वासियो के लिए सांसद मे रेल की मांग रखी।
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