सूर्य ग्रहण पर हरिद्वार में गंगा स्नान का है विशेष महत्व
इन शुभ कार्यो से पितृ होंगे तृप्त, ज्योतिषि से जानें पूजन विधि
हरिद्वार, कलयुग में मां गंगा को मोक्षदायनी और पाप नाशनी कहा गया है. धार्मिक ग्रंथों, वेदों, शास्त्रों और पुराणों में गंगा का महत्व सबसे अधिक बताया गया है. मां गंगा को लेकर वेदों व पुराणों का यही मत है कि कलयुग में मां गंगा सभी पाप खत्म करने और मोक्ष प्रदान करने वाली है.
तीर्थ नगरी हरिद्वार मोक्ष प्राप्ति के लिए जगत प्रसिद्ध है. हरिद्वार में धार्मिक पर्वों पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु देश के अलग-अलग राज्यों से गंगा स्नान करने के लिए आते हैं. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार हिंदू पर्वों पर गंगा स्नान करने से उस काम का कई गुना फल प्राप्त होता है और मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है.
भगवान शिव और ब्रह्मा से जुड़ा है हरिद्वार का महत्व
प्राचीन काल में देवताओं और असुरों के बीच हुए समुद्र मंथन और उससे निकले अमृत कलश से हरिद्वार में अमृत की बूंदे गिरी थी. इसलिए, हरिद्वार में मां गंगा का महत्व अधिक बढ़ जाता है. धार्मिक ग्रंथों, शास्त्रों, वेदों और पुराणों के अनुसार मां गंगा का धरती पर अवतरण सगर के 60 हजार पुत्रों को मोक्ष देने के लिए हुआ था. इसलिए, आज भी लोग मोक्ष प्राप्ति के लिए गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर पुण्य प्राप्त करते हैं. हरिद्वार का प्राचीन नाम हरद्वार (भोलेनाथ का द्वार), मायापुरी, गंगा द्वार है. हरिद्वार में भगवान शिव का ससुराल है. वहीं हरिद्वार में भगवान ब्रह्मा की तपस्थली है, जहां उन्होंने हजारों लाखों साल तक तपस्या की थी. पूरे संसार में हरिद्वार के हरकी पौड़ी पर गंगा स्नान करने का सबसे अधिक महत्व बताया जाता है.
हरिद्वार में गंगा स्नान का है विशेष महत्व
साल 2024 में 2 अक्टूबर को पितृ विसर्जन अमावस्या और सूर्य ग्रहण पर गंगा स्नान करने के महत्व को लेकर हरिद्वार के विद्वान ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री ने लोकल 18 को बताया कि पितृ विसर्जन अमावस्या के दिन दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण होगा. पितृ विसर्जन अमावस्या पर गंगा स्नान करने के बाद पितरों के निमित्त कोई भी धार्मिक कार्य श्राद्ध कर्म, तर्पण, पिंडदान, कर्मकांड आदि किया जाए तो उसका संपूर्ण फल कई गुना मिलता है. साथ ही ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव भी खत्म हो जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार पितरों को मोक्ष प्रदान करने के लिए मां गंगा में आस्था की डुबकी लगाकर कार्य करने पर पितृ तृप्त होकर अपने लोक चले जाते हैं और अपने वंशजों को सुख-समृद्धि से लेकर वंश वृद्धि का आशीर्वाद प्रदान करते हैं. इस दिन पितरों का श्राद्ध कर्म, तर्पण आदि विधि-विधान से करने के बाद उन्हें विदाई दी जाती है.
पितरों को मोक्ष प्रदान करती है मां गंगा
ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री ने बताया कि मां गंगा का धरती पर अवतरण मनुष्य को मोक्ष देने के लिए हुआ था. मां गंगा के धरती पर अवतरण को लेकर वेदों व पुराणों में एक कथा का वर्णन आता है. प्राचीन काल में राजा सगर के 60 हजार पुत्रों का उद्धार और उन्हे मोक्ष मां गंगा ने ही प्रदान किया था. वैसे ही मां गंगा पितृ विसर्जन अमावस्या पर आपके पितरों को मोक्ष प्रदान करेगी, जिससे आपके पितृ प्रसन्न होकर आपको शुभ फल प्रदान करेंगे. यदि कोई व्यक्ति पितृ दोष से पीड़ित है या किसी के पितरों की गति नहीं हो पाई है या फिर किसी के पितृ प्रेत योनि में भटक रहे हैं तो गंगा स्नान कर शास्त्रों की विधि के अनुसार पितरों का श्राद्ध कर्म करें. इससे पितरों को शांति मिलती है और मां गंगा उन्हें मोक्ष प्रदान करती है. ज्योतिषी ने बताया कि मां गंगा का सबसे अधिक महत्व तीर्थ नगरी हरिद्वार में है. इसलिए, पितृ विसर्जन अमावस्या के दिन हरिद्वार में गंगा स्नान कर पितरों को जलांजलि देने का बहुत अधिक महत्व है.
ग्रहण के दिन गंगा स्नान करने से नाकारात्मक प्रभाव होगा खत्म
ज्योतिषाचार्य पंडित श्रीधर शास्त्री ने बताया कि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रहण पर गंगा स्नान करने से इसका नकारात्मक प्रभाव खत्म हो जाता है. 2 अक्टूबर को साल 2024 का दूसरा और आखिरी सूर्य ग्रहण होगा. विज्ञान के अनुसार यह सूर्य ग्रहण देश में दृश्यमान नहीं होगा. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव विश्व के सभी व्यक्तियों पर पड़ता है. यदि इस दिन गंगा के मंत्रों का जाप करते हुए गंगा स्नान किया जाए तो ग्रहण का नकारात्मक प्रभाव पूर्ण रूप से खत्म होने की धार्मिक मान्यता है.
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