राजनांदगांव, छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में स्थित डोंगरगढ़ का मां बम्लेश्वरी मंदिर एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जहां श्रद्धालु रोपवे के माध्यम से दर्शन के लिए पहुंचते हैं। हाल ही में, शुक्रवार को यहां एक गंभीर रोपवे हादसा हुआ, जिसमें भाजपा नेता और पूर्व गृहमंत्री रामसेवक पैकरा, भाजपा प्रदेश महामंत्री भरत वर्मा, मनोज अग्रवाल और दया सिंह सवार थे। हादसे में सभी नेताओं को चोटें आईं, जिनमें भरत वर्मा को गंभीर चोटें लगीं। प्रारंभिक जांच में रोपवे के मेंटेनेंस में लापरवाही को हादसे का कारण माना गया है।

हादसे की पृष्ठभूमि

डोंगरगढ़ के मां बम्लेश्वरी मंदिर में रोपवे की ट्रॉली गिरने से भाजपा नेता रामसेवक पैकरा, भरत वर्मा, मनोज अग्रवाल और दया सिंह घायल हो गए। भरत वर्मा को गंभीर चोटें आईं। हादसे के बाद रोपवे संचालन समिति पर एफआईआर दर्ज की गई है। रोपवे संचालक कंपनी ने हादसे का कारण वोल्टेज फ्लक्चुएशन बताया, जबकि बिजली विभाग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कंपनी के खिलाफ अलग से शिकायत दर्ज कराई है। जिला कलेक्टर ने तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की है, जो सात दिनों में रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।

वीआईपी मूवमेंट और भीड़ प्रबंधन की चुनौतियाँ

धार्मिक स्थलों पर वीआईपी मूवमेंट के दौरान विशेष व्यवस्थाएं की जाती हैं, जिससे आम श्रद्धालुओं की आवाजाही प्रभावित होती है। इससे भीड़ में असंतोष और अफरातफरी की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जो भगदड़ का कारण बन सकती है। इसलिए, वीआईपी मूवमेंट के दौरान सुरक्षा प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण के उपायों की सख्त आवश्यकता है।

पूर्ववर्ती हादसे और उनसे मिले सबक

भारत में रोपवे और धार्मिक आयोजनों में पहले भी कई हादसे हो चुके हैं, जैसे:

    •    देवघर, झारखंड (अप्रैल 2022): त्रिकूट पहाड़ पर रोपवे की रस्सी टूटने से ट्रॉली गिर गई, जिसमें तीन लोगों की मौत हुई और कई लोग 40 घंटे तक हवा में फंसे रहे।

    •    पारासनाथ, झारखंड (2009): रोपवे की तकनीकी खराबी के कारण ट्रॉली फंस गई, जिससे यात्रियों को घंटों तक इंतजार करना पड़ा।

    •    मनाली, हिमाचल प्रदेश (2017): रोपवे के केबल में खराबी के कारण ट्रॉली में सवार पर्यटक फंस गए, जिन्हें बाद में सुरक्षित निकाला गया।

    •    प्रयागराज, उत्तर प्रदेश (जनवरी 2025): महाकुंभ के दौरान संगम नोज पर एक बैरियर टूटने से भगदड़ मच गई, जिसमें कई लोग घायल हो गए।

इन घटनाओं से स्पष्ट है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी और भीड़ प्रबंधन की कमी गंभीर हादसों का कारण बन सकती है।

सुरक्षा उपाय और सुझाव

इन हादसों से सबक लेते हुए, निम्नलिखित उपायों को अपनाया जाना चाहिए:

    1.    नियमित निरीक्षण और मेंटेनेंस: रोपवे की नियमित जांच और मेंटेनेंस सुनिश्चित किया जाए, ताकि तकनीकी खामियों को समय रहते दूर किया जा सके।

    2.    प्रशिक्षित स्टाफ की नियुक्ति: रोपवे संचालन के लिए प्रशिक्षित और अनुभवी कर्मचारियों की नियुक्ति आवश्यक है।

    3.    आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली: हादसे की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया के लिए आपातकालीन योजना और उपकरणों की व्यवस्था होनी चाहिए।

    4.    स्वतंत्र ऑडिट: रोपवे संचालन की स्वतंत्र एजेंसियों द्वारा समय-समय पर ऑडिट कराई जाए, ताकि निष्पक्ष मूल्यांकन हो सके।

    5.    जनजागरूकता: यात्रियों को रोपवे उपयोग के दौरान सुरक्षा निर्देशों के प्रति जागरूक किया जाए।

    6.    वीआईपी मूवमेंट का समुचित प्रबंधन: धार्मिक स्थलों पर वीआईपी मूवमेंट के दौरान आम श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा का विशेष ध्यान रखा जाए, ताकि भीड़ में असंतोष और भगदड़ जैसी घटनाएं न हों।

डोंगरगढ़ रोपवे हादसा एक गंभीर चेतावनी है, जो दर्शाता है कि धार्मिक स्थलों पर सुविधाओं की सुरक्षा को लेकर कितनी लापरवाही बरती जा रही है। इस हादसे से सबक लेते हुए, रोपवे संचालन में पारदर्शिता, उत्तरदायित्व और सुरक्षा मानकों का पालन अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसे हादसों की पुनरावृत्ति न हो और श्रद्धालुओं की यात्रा सुरक्षित बनी रहे।