शहडोल की कराटे प्लेयर जूनियर एशियन चैंपियनशिप के लिए सिलेक्ट
टैलेंटेड खिलाड़ियों की वजह से भी अलग पहचान बना रहा है शहडोल
Curated by - Krishna Tiwari | CITYCHIEFNEWS
शहडोल, शहडोल यहां की प्राकृतिक खूबसूरती खनिज संसाधन के लिए पहचाना जाता है, बल्कि अब ये जिला यहां के एक से बढ़कर एक टैलेंटेड खिलाड़ियों की वजह से भी अलग पहचान बना रहा है, भले ही यहां के कुछ युवा खिलाड़ी आर्थिक तौर पर कमजोर हैं, लेकिन खेल में उनके टैलेंट का कोई तोड़ नहीं, आज बात एक ऐसे ही युवा कराटे खिलाड़ी आरती तिवारी की जिसने अभी हाल ही में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है और जूनियर एशियन चैंपियनशिप के लिए सिलेक्ट हुई हैं, लेकिन अब उनके सामने एक ऐसी आर्थिक मजबूरी आ गई है जिसके बाद अब उस टूर्नामेंट में उनके शामिल होने में ही असमंजस बन गया है।
शहडोल जिले की आरती तिवारी युवा कराटे खिलाड़ी है पिछले कुछ साल से वह कराटे में लगातार सफलता हासिल करते जा रही हैं, आरती शहडोल जिला मुख्यालय से लगे हुए गोरतरा गांव की रहने वाली हैं, और काफी संघर्ष के बाद आरती ने अब कराटे के इस खेल में बड़ी उपलब्धियाँ हासिल कर ली हैं, और युवा ग्रामीण लड़कियों के लिए रोल मॉडल भी बन रही हैं। आरती तिवारी की उम्र 16 से 17 साल के बीच है और अब उन्होंने एक नई उपलब्धि हासिल की है आरती तिवारी जूनियर एशियन चैंपियनशिप के लिए सिलेक्ट हुई हैं, जो उनके लिए ही नहीं बल्कि पूरे मध्य प्रदेश शहडोल जिले के लिए के लिए एक बड़ी उपलब्धि है
युवा कराटे खिलाड़ी आरती तिवारी का कहना है कि जूनियर एशियन चैंपियनशिप के लिए वह सिलेक्ट हो गई हैं और ये मुकाबला उज्बेकिस्तान में खेला जाना है जो 16 से 20 दिसंबर के बीच ये टूर्नामेंट होगा जूनियर एशियन चैंपियनशिप के लिए आरती - 53 किग्रा वर्ग के मुकाबले में शामिल होंगी
आरती तिवारी पहले तो शहडोल में ही प्रैक्टिस किया करती थीं लेकिन अब पिछले कुछ समय से जबलपुर के साई सेंटर में ट्रेनिंग कर रही हैं,
आरती तिवारी शुरुआत से ही एक टैलेंटेड खिलाड़ी है और हर टूर्नामेंट में सफलता हासिल कर रही है और गोल्ड जीतने में कामयाब हो रही है उनके शुरुआती कोच भी बताते हैं कि आरती में एक अलग ही टैलेंट है जब उन्होंने आरती को ट्रेनिंग देना शुरू किया था तभी उन्हें लगा था की आरती अपने इस खेल के माध्यम से दूर तलक जाएगी उनके शुरुआती कोच को तो आरती से ओलंपिक में भी मेडल की उम्मीद है आरती बताती हैं कि उन्होंने अब तक 7 नेशनल में गोल्ड मेडल जीते हैं, इसके अलावा स्टेट्स में भी उनके कई गोल्ड मेडल हैं।
एसोसिएशन तो मुझे सपोर्ट कर रहा है, लेकिन फाइनेंशयली नहीं हो पा रहा है ऐसे टूर्नामेंट में हिस्सा लेने के लिए फाइनेंशियली खुद का खर्च सेल्फ उठाना पड़ता है उसके लिए जाने आने के लिए वहां रहने के लिए इन सब के लिए स्पॉन्सरशिप नहीं मिल पा रही है, और अगर सही समय पर स्पॉन्सरशिप नहीं मिलता है तो हो सकता है कि मैं टूर्नामेंट खेलने भी ना जा पाऊं।
ये हमारे देश की विडंबना है कि खिलाड़ी मेहनत करता है कड़ी मेहनत और अपने टैलेंट से मुकाम तक पहुंचने की कोशिश करता है, और जब मंजिल के करीब पहुंच जाता है तो उसके सामने ऐसी मजबूरियां आ जाती हैं
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